योग और ब्रह्मचर्य
योग और ब्रह्मचर्य ब्रह्मचर्य पालन के बिना योग करना व्यर्थ है। आज हम कुछ महत्वपूर्ण बातें जानने की कोशिश करेंगे। जो योग और ब्रह्मचर्य का पालन करने के लिए जरूरी है… अगर आप बिना योगाभ्यास के ब्रह्मचर्य का पालन करोगे तो आपका ब्रह्मचर्य खंडित होना तय है क्योंकि वीर्य एक ऊर्जा है और ऊर्जा का काम है, नष्ट होना। योग से वीर्य उर्दगामी होकर शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। और सहस्रार चक्र तक पहुंचकर समाधि की स्थिति को प्राप्त करता है। जो बिना योग अभ्यास के असंभव है। योग व ब्रह्मचर्य का अभ्यास करने वाले व्यक्ति को लहसुन-प्याज, मदिरापान, धूम्रपान, मांस, अंडा और अधिक गर्म मसाले का सेवन तुरंत बंद कर देना चाहिए। शाकाहारी व सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए। नमक का कम से कम सेवन करना चाहिए लंबे समय के ब्रह्मचर्य और योगाभ्यास के लिए नमक का सर्वथा त्याग कर देना चाहिए। सुबह 3:00 से 4:00 बजे उठकर ध्यान व योग अभ्यास अवश्य करना चाहिए। क्योंकि ब्रह्म मुहूर्त में शरीर की उत्तेजना चरम पर होती है। उस उत्तेजना का फायदा योगाभ्यास करके उठाना चाहिए ना कि स्वपनदोष और हस्तमैथुन कर ऊर्जा को नष्ट करना चाहिए। रात्रि का भ...