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भगवान और भक्त

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  "भगवान और भक्त में झगड़ा" एक बार, एक व्यक्ति भगवान से उलझ गया... और कहने लगा हे! भगवान तू लोगों के साथ गलत व्यवहार करता है और अछो के साथ बुरा और बुरो के साथ अच्छा करता है। भगवान और भक्त  जब किसान को बारिश चाहिए तो तू सूखा देता है, और जब सुखा चाहिए तो बारिश... दे देता है। यह तेरा कैसा न्याय है। तूम कुछ दिन के लिए इस गद्दी से हटो और भगवान की गद्दी मुझे संभालने दो।  भगवान ने कहा नहीं, रहने दे यह तेरे बस की बात नहीं है। मैं अपने हिसाब से सब के साथ उचित करता हूं। वह व्यक्ति नही माना और भगवान के पीछे पड़ गया...  भगवान ने कहा नहीं मानता तो ले, तू चला कर देख ले दुनिया कैसे चलती है... बस फिर क्या था वह लगा दुनिया चलाने...😢 जो लोगों को चाहिए वह व्यक्ति सब कुछ देता गया। बारिश के समय उचित बारिश दी, गर्मी के समय उचित गर्मी, और सर्दी के समय उचित सर्दी... किसी को कोई कष्ट नहीं दिया।  किसानों ने खेत में बीज डाले समय पर बारिश दी, जब फसल बड़ी हुई तो, किसानों के चेहरे खिल उठे, फसल ऐसे लहरा रही थी मानो किसानों के चेहरे पर चार चांद लग गए हो। किसान बहुत खुश थे।  उस व्यक्ति ने...

सही दिशा में मेहनत करो

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  "सफलता मेहनत करने से नहीं, सही दिशा में मेहनत करने से मिलती है" एक राजा ने दो लकड़ी काटने वाले लकड़हारो को आदेश दिया कि, आप को जंगल में एक-एक पेड़ काटना है... और सूर्य उदय होने से लेकर, सूर्य अस्त होने से पहले जो पेड़ काट देगा, उसे मुंह मांगा इनाम दिया जाएगा…  सही दिशा में मेहनत करो दोनों लकड़हारे बहुत खुश हुए... एक लकड़हारा इतना खुश हुआ की सूर्य उदय होते ही अपनी कुल्हाड़ी लेकर पहुंच गया और पेड़ काटना प्रारंभ कर दिया... लेकिन यह क्या दूसरा लकड़हारा गायब...😢 10:00 बजे, 12:00 बजे, दोपहर खत्म, 2:00 बजे, शाम के 4:00 बज गए... लेकिन दूसरा लकड़हारा गायब... लेकिन यह क्या…? सुबह सूर्य उदय होने से लेकर, शाम के 4:00 बजे तक पहले लकड़हारे से पेड़ का थोड़ा सा हिस्सा ही कटा था… थोड़ी देर में दूसरा लकड़हारा आया और आधे घंटे में ही पेड़ को तहस-नहस कर दिया… पूरा पेड़ काट के जमीन पर बिछा दिया और राजा के पास गया और बोला, राजा साहब मैंने पेड़ काट दिया आप मुझे मुंह मांगा इनाम दीजिए… और वहां दूसरा लकड़हारा सूर्यास्त होने के बाद भी पेड़ को काटता रहा लेकिन फिर भी पेड़ पूरी तरह से नहीं कटा…  राजा ...

"दो गधो की कहानी…"

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  "दो गधो की कहानी…" बहुत समय पहले की बात है। एक धोबी अपने दो गधों पर नमक की चार-चार बोरिया लादकर, शहर बेचने के लिए जा रहा था। "दो गधो की कहानी…" एक गधे की तबीयत कुछ सही नहीं थी। आधा रास्ता पार करने के बाद उस गधे ने दूसरे गधे से कहा की, हे! दोस्त आज मेरी तबीयत कुछ सही नहीं है। मैं एक नमक का बोरा नीचे गिरा देता हूं और आगे निकल जाऊंगा, हमारा मालिक वह बोरी तुम्हारी पीठ पर रख देगा। मेरा वजन कुछ कम हो जाएगा मैं सही से चल पाऊंगा… दूसरे गधे ने कहा कि मैं तुम्हारा वजन क्यों झेलूँ अपना वजन अपने आप झेलो मुझे मेरा वजन ही भारी लग रहा है…  बीमार गधा अपना सा मुंह लेकर चुपचाप चलता रहा। थोड़ी दूर जाने के बाद उसे असहनीय दर्द हुआ और वह गिरकर बेहोश हो गया। थोड़ी देर में उसके प्राण पखेरू शरीर से फुर्र हो गए…  अब उस मरे हुए गधे की चारों बोरियां एक ही गधे पर लाद दी, अगर यह गधा अपने दोस्त की बात मानकर उसका दर्द बांट लेता तो, उसकी जान भी बच जाती और उसकी चारों बोरियों की जगह एक बोरी ही लाद कर चलनी पड़ती... शिक्षा:- अगर कोई मुसीबत में है तो, हमें उसकी सहायता करनी चाहिए और दूसरों का दुख बांटन...

मन को वश में कैसे करें

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एक जगह बहुत पहुंचे हुए सिद्ध महात्मा रहते थे। वे लोगों की सेवा करते और उनकी मनोकामना पूरी करते थे। उसी गांव में एक गरीब लाचार किसान रहता था।  वह महात्मा के पास पहुंचा और कहा महात्मा जी आप सब के दुख दूर करते हो मेरे भी कर दो। महात्मा जी को उस किसान पर दया आ गई और उन्होंने कहा कि यह लो एक चिराग इसको रगड़ते ही एक जिन्न प्रकट होगा। उसकी एक शर्त होगी कि उसे हमेशा कुछ न कुछ कार्य देना होगा। अगर आपने उसे काम नहीं दिया, वह खाली रहा तो, वह तुझे खा जाएगा।  बूढ़े किसान ने सोचा मेरे पर बहुत काम है। आस पड़ोसियों के काम करवा दूंगा मैं बहुत दिनों तक उसको व्यस्त करके रखूंगा। जैसे किसान घर पहुंचा उसने चिराग रगड़ा जिन्न उत्पन्न हुआ। उसने कहा मुझे काम बता नहीं तो मैं तुजे खा जाऊंगा। किसान ने सारे काम बता दिए वह एक क्षण में ही काम खत्म करके बोला दूसरा काम बताओ नहीं तो मैं तुझे खा जाँऊगा।  किसान ने अपने सारे काम करवा लिए। आस-पड़ोसियों के काम भी करवा लिए। वह तो जिन्न था उसे कितना टाइम लगता सारे काम खत्म हो गए... जिन बोला मुझे काम बता नहीं तो मैं तुझे खाऊंगा।  बूढ़ा किसान बेचारा परेशान हो गय...