योग का ज्ञान पृथ्वी पर कैसे आया || योग || योग का इतिहास || history of yoga
"योग का ज्ञान पृथ्वी पर कैसे आया" एक बार पार्वती जी ने भगवान शंकर से पूछा कि, मेरी हर बार मृत्यु होती है और मैं हर बार नए अवतार में आती हूं। कभी लक्ष्मी, कभी दुर्गा, कभी वैष्णव, कभी काली, कभी पार्वती... लेकिन आपकी ना तो मृत्यु होती है और ना ही जन्म। यह कैसे संभव है…? इसका रहस्य बताने की कृपा करें…? योग का ज्ञान पृथ्वी पर कैसे आया भगवान शंकर ने कहा कि रहने दो, यह बहुत जटिल विषय है। इसके बारे में न जानो तो सही रहेगा। लेकिन पार्वती जिद पर अड़ जाती है और रहस्य जानने के लिए व्याकुल हो उठती है। भगवान शंकर कहते है, नहीं मानती हो तो सुनो यह सब "योग" से संभव है। पार्वती जी, उस योग के ज्ञान को जानने की जिज्ञासा उत्पन्न करती है। भगवान शंकर टालमटोल करने लगते है। परंतु नारी का हट एक तरफ और भगवान शंकर को हार कर पार्वती जी को योग का ज्ञान बताना ही पड़ता है। वे एक ऐसे स्थान का चयन करते है। जहां पर आस-पास कोई ना हो। जिससे यह महायोग का ज्ञान किसी ऐसे व्यक्ति के पास न चला जाए जो इसका दुरुपयोग कर समाज का विनाश करें। इसलिए वे पार्वती जी को लेकर बहुत दूर एक शांत सरोवर में, पार्वती जी क...