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"दो गधो की कहानी…"

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  "दो गधो की कहानी…" बहुत समय पहले की बात है। एक धोबी अपने दो गधों पर नमक की चार-चार बोरिया लादकर, शहर बेचने के लिए जा रहा था। "दो गधो की कहानी…" एक गधे की तबीयत कुछ सही नहीं थी। आधा रास्ता पार करने के बाद उस गधे ने दूसरे गधे से कहा की, हे! दोस्त आज मेरी तबीयत कुछ सही नहीं है। मैं एक नमक का बोरा नीचे गिरा देता हूं और आगे निकल जाऊंगा, हमारा मालिक वह बोरी तुम्हारी पीठ पर रख देगा। मेरा वजन कुछ कम हो जाएगा मैं सही से चल पाऊंगा… दूसरे गधे ने कहा कि मैं तुम्हारा वजन क्यों झेलूँ अपना वजन अपने आप झेलो मुझे मेरा वजन ही भारी लग रहा है…  बीमार गधा अपना सा मुंह लेकर चुपचाप चलता रहा। थोड़ी दूर जाने के बाद उसे असहनीय दर्द हुआ और वह गिरकर बेहोश हो गया। थोड़ी देर में उसके प्राण पखेरू शरीर से फुर्र हो गए…  अब उस मरे हुए गधे की चारों बोरियां एक ही गधे पर लाद दी, अगर यह गधा अपने दोस्त की बात मानकर उसका दर्द बांट लेता तो, उसकी जान भी बच जाती और उसकी चारों बोरियों की जगह एक बोरी ही लाद कर चलनी पड़ती... शिक्षा:- अगर कोई मुसीबत में है तो, हमें उसकी सहायता करनी चाहिए और दूसरों का दुख बांटन...

"हमेशा अपने लक्ष्य पर ध्यान दो"

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  "हमेशा अपने लक्ष्य पर ध्यान दो" एक समय की बात है। एक हिरण को बहुत तेज प्यास लगी और वह पानी की तलाश में दर-दर भटकने लगा... अचानक से उसे एक तालाब दिखाई दिया… "हमेशा अपने लक्ष्य पर ध्यान दो"  तलाब देखते ही वह पानी पर ऐसे टूट पड़ा जैसे, भूखा भोजन पर... परंतु यह क्या…? तालाब के पास पहुंचते ही उसने बाएं तरफ देखा तो, एक शिकारी उसकी तरफ बांड पर तीर लगाए निशाना साधे बैठा था...😢  उसने सोचा दाएं तरफ भाग जाता हूं... दाएं तरफ शेर उसकी घात लगाए बैठा था। उसने सोचा पीछे की तरफ भाग जाता हूं। प्यास से ज्यादा जान की कीमत थी…  वह पीछे देखता है कि, जंगल में भयंकर आग लगी हुई है। उसने सोचा आगे पानी में तैरकर नदी पार कर जाता हूं। लेकिन नदी में इतने मगरमच्छ थे कि, एक कदम भी आगे बढ़ाता तो उसकी जान जा सकती थी…   उसने सोचा अब खतरा चारों तरफ है तो, मरना तय है😢 तो, क्यों ना जिस काम के लिए आया हूं, वह काम पूरा कर लिया जाए….  वह पानी पीने में लग गया... उसने इस बात की परवाह नहीं की कि….😢 शिकारी उसके ऊपर बाड चला देगा, शेर उसका शिकार कर लेगा, जंगल की आग बढ़ते हुए उस को अपनी चपेट मे...

"गधों से हमेशा दूरी बनाए रखें"

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  " गधों से हमेशा दूरी बनाए रखें" बहुत समय पहले की बात है। पूर्णिमा का की रात थी। चंद्रमा पूरे शबाब पर था। रात के 12:00 बजे थे। एक गधे को नीद नही आ रही थी इसी कारण वह, टहलने के लिए एक तालाब के किनारे पहुंचा... "गधों से हमेशा दूरी बनाए रखें"  तालाब के किनारे पहुंचते ही उसने तालाब में चंद्रमा की पूरी तस्वीर देखी…. और वह सोचने लगा कि हे! भगवान चंद्रमा तालाब में डूब गया...😢 मुझे इस को बचाना चाहिए...  इतना सोचते ही गधे ने उसको निकालने की कोशिश की...😢 और एक बाल्टी और एक बड़ी रस्सी लेकर तालाब के पास पहुँचा… गधे ने जैसे ही तलाब में बाल्टी और रस्सी डाली उसमें एक बहुत बड़ा मगरमच्छ फस गया...😢 गधे ने उसको ऊपर खींचने की बहुत कोशिश की परंतु वह नहीं खींचा…  अचानक से गधे के हाथ से राशि छूट गई... और गधा बहुत दूर जाकर गिरा और बेहोश हो गया…  बहुत देर बाद गधे को होश आया और उसकी आंखें खुली तो…! उसने आसमान में चांद को देखा... और कहने लगा हे! भगवान आपका लाख-लाख शुक्र है... कि मेरे अथक प्रयासों से चंद्रमा को तालाब से निकालकर आसमान में भेज दिया...😢  लेकिन यह बात में अगर किसी को...

"कुछ नया खोजो"

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  "कुछ नया खोजो"  एक गांव में बहुत सारे लोग रहते थे, यह गांव दुनिया से कटा हुआ था। वे सीमित जिंदगी जीते थे। उन्होंने कभी उस गांव के बाहर की दुनिया नहीं देखी थी। वह बाहर की दुनिया से अनजान थे।  उसी गांव में कुछ जानवर रहते थे। वे भी हमेशा परेशान रहते थे। क्योंकि खास मौसम में उन्हें खाने की समस्या उत्पन्न होती थी। कुछ नया खोजो वहाँ एक गधे ने सोचा कि क्यों ना इस गांव से बाहर निकल कर कहीं खाने-पीने का इंतजाम किया जाए। उसने अन्य जानवरों से बात की सभी ने इंकार कर दिया...   गधे ने मन बना लिया था। लेकिन गांव से बाहर जाने का कोई रास्ता नही था... गधे ने मन में ठान लिया और वह एक दिन गांव से बाहर निकल गया…  गधा जिस रास्ते पर गया, वहा एक पगडंडी बन गई। फिर दूसरे जानवरों ने सोचा की गधा तो चला गया। वह हरी-हरी घास खा रहा होगा और मजे ले रहा होगा। अब हमें भी चलना चाहिए।  उसके बाद कुछ बकरे-बकरियां भी उसी रास्ते पर चल दिए। फिर उसके बाद अन्य जानवर भी धीरे-धीरे गांव छोड़कर जाने लगे। गांव वालो ने देखा गांव के जानवर कम होते जा रहे है। तो उन्होंने भी सोचा कि अब हमें भी इस गांव स...

"ईश्वर सब जगह है"

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  "ईश्वर सब जगह है" एक बार अकबर के दिमाग में कुछ हलचल हुई और कुछ प्रश्नों के उत्तर खोजने की मनसा पैदा हुई। अकबर का  दरबार लगा तो उसने चार प्रश्नों के उत्तर खोजने की जिज्ञासा प्रकट की… 1 आसमान में कितने तारे है…? 2 हमारे देश में कितने कोए है…? 3 धरती का छोर कहा है...  3 और अल्लाह-ताला कहां रहता है, और क्या करता है…? सब की निगाहें बीरबल की तरफ थी। क्योंकि बीरबल ही एक ऐसे व्यक्ति थे जो, ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में सक्षम थे।  राजा ने सोचा इन प्रश्नों का उत्तर ऐसे तो नहीं मिलेगा। उत्तर बीरबल ही दे सकता है, और जब तक बीरबल को बलपूर्वक नहीं कहेंगे जब तक वह उत्तर नहीं देगा। सभी राजदरबारियों ने बीरबल से उत्तर देने का आग्रह किया। अंत में राजा ने बीरबल को बोला कि हे! बीरबल आप इन चार प्रश्नों का उत्तर खोज के लाइए अन्यथा आपको मृत्युदंड दिया जाएगा😢  बीरबल परेशान हो गया लेकिन, बीरबल तो बीरबल था। उसने सोचा अब मरना तो तय है। मरने से पहले कुछ उपाय कर लेते है। उसने राजा से कहा कि हे! राजन मुझे कुछ धन की आवश्यकता होगी और कुछ समय चाहिए। जिससे कि मैं इन प्रश्नों का उत्तर खोज सकूं।...

"मन में चल रहे द्वंदो की शक्ति"

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  बहुत समय पहले की बात है। एक पहुंचे हुए सिद्धमहात्मा  थे। उनको जो कुछ भी भेंट में मिलता था, वह सभी सामान कुटिया में रख देते थे। वे उसी चीज का इस्तेमाल करते थे जो, उनके लिए बहुत जरूरी थी। काफी समय बीतने के बाद उन्होंने सोचा कि अपने पुराने मित्रों से मिलना चाहिए। जैसे ही महात्मा कुटिया से बहार निकले उनके बहुत खास मित्र उनसे मिलने आए। लेकिन वह बारिश और कीचड़ में बहुत बुरी तरह अपने कपड़े खराब कर चुके थे।  महात्मा जी ने कहा देखो, मैं कुटिया में तो नहीं रुक सकता। आप मेरे साथ चल सकते हो। लेकिन उनके कपड़े खराब हो चुके थे। इसलिए उन्होंने आग्रह किया कि आपके पास कोई पुराने कपड़े हो तो मैं भी आपके साथ चल सकू। उन्होंने कुटिया में जाकर देखा कुछ समय पहले एक राजा ने उनको बहुत ही अच्छा राजसी पोशाक दी थी। वह पोशाक उन्होंने अपने मित्र को दी और दोनों साथ में चल दिए… महात्मा जी ने जब पोशाक पहने अपने मित्र को देखा तो उनके मन में ईर्ष्या उत्पन्न हो गई है। उन्होंने सोचा यह तो बहुत ही अच्छा और सुंदर लग रहा है जबकि मैं एक महात्मा… फिर उन्होंने सोचा कि मैं एक संत हूं। मुझे ऐसा नहीं सोचना चाहिए। अप...