मन को वश में कैसे करें


एक जगह बहुत पहुंचे हुए सिद्ध महात्मा रहते थे। वे लोगों की सेवा करते और उनकी मनोकामना पूरी करते थे। उसी गांव में एक गरीब लाचार किसान रहता था।


मन को वश मैं केसे करे

 वह महात्मा के पास पहुंचा और कहा महात्मा जी आप सब के दुख दूर करते हो मेरे भी कर दो। महात्मा जी को उस किसान पर दया आ गई और उन्होंने कहा कि यह लो एक चिराग इसको रगड़ते ही एक जिन्न प्रकट होगा। उसकी एक शर्त होगी कि उसे हमेशा कुछ न कुछ कार्य देना होगा। अगर आपने उसे काम नहीं दिया, वह खाली रहा तो, वह तुझे खा जाएगा।


 बूढ़े किसान ने सोचा मेरे पर बहुत काम है। आस पड़ोसियों के काम करवा दूंगा मैं बहुत दिनों तक उसको व्यस्त करके रखूंगा। जैसे किसान घर पहुंचा उसने चिराग रगड़ा जिन्न उत्पन्न हुआ। उसने कहा मुझे काम बता नहीं तो मैं तुजे खा जाऊंगा। किसान ने सारे काम बता दिए वह एक क्षण में ही काम खत्म करके बोला दूसरा काम बताओ नहीं तो मैं तुझे खा जाँऊगा।


 किसान ने अपने सारे काम करवा लिए। आस-पड़ोसियों के काम भी करवा लिए। वह तो जिन्न था उसे कितना टाइम लगता सारे काम खत्म हो गए... जिन बोला मुझे काम बता नहीं तो मैं तुझे खाऊंगा।


 बूढ़ा किसान बेचारा परेशान हो गया उसने सोचा क्या मुसीबत है…?  दौड़ता-दौड़ता बाबा जी के पास गया... महात्मा जी आपने क्या मुसीबत दे दी... बोलो क्या समस्या है…?  किसान ने कहा बाबा समस्या ये है की यह कहता है मुझे काम दे नहीं तो मैं तुझे खा जाऊंगा... महात्मा ने कहा यह बात तो मैंने तुझे पहले ही कही थी। किसान ने कहा महात्मा जी  मुझे इस मुसीबत से बचा लो…


महात्मा जी ने कहा बस इतनी सी बात, चलो घर, महात्मा जी किसान के घर आ गए। किसान को आदेश दिया कि जिन्न से बोलो एक लंबा सा बांस लेकर आए। किसान ने वैसा ही किया। फिर महात्मा ने कहा इसको बोलो यह इसे जमीन में गाड़ दे। किसान ने वैसा ही कहा, जिन्न ने बांस को जमीन में गाड़ दिया। फिर महात्मा ने जिन्न को आदेश दिया कि इस बांस के ऊपर चढ़े और नीचे उतर, फिर ऊपर चढ़े और नीचे उतरे... जब तक दूसरा काम ना दिया जाए यही काम करना है… 


मित्रों यह जो जिन्न है, यह हमारा मन है। बांस हमारी प्राण है। महात्मा सिद्ध पुरुष, ईश्वर, भगवान, आदिनाथ... है। किसान हमारी आत्मा है।


 जिस तरह से जिन्न रूपी मन, आत्मा रूपी किसान को परेशान करता है। उसी तरह से हमारे शरीर में हमारा मन हमारी आत्मा को हमेशा परेशान करता रहता है। हमें चाहिए कि अपनी आत्मा को अपने ईश्वर भक्ति में लगाकर अपने मन को स्वास रूपी डोरी से बांध देना चाहिए। जिस तरह से जिन्न बांस के ऊपर और नीचे चक्कर लगाता है। उसी तरह से अपने मन को अपने स्वास के साथ ऊपर और नीचे करना चाहिए। इसी को योग में प्राणायाम कहा गया है।


#kailashbabustory


धन्यवाद





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