मछुआरे ने खोली नई दुकान
एक बार एक मछुआरे ने अपनी नई दुकान खोली दुकान बाजार के मुख्य मार्ग पर थी। उसने एक बड़ा सा बोर्ड बनवाया उस पर लिखवाया कि, "यहां पर सस्ती, ताजी व जिंदा मछलियां मिलती है।"
वहां से एक व्यक्ति गुजर रहा था। उसने बोर्ड पढ़ा और मछुआरे से कहा की " क्या आप मरी हुई मछलियां भी बेचते हो…?" मछुआरे ने कहा नहीं मैं सिर्फ "ताजी और जिंदा मछली बेचता हूं।" उसने कहा तो फिर यहां "जिंदा मछलियां" लिखवाने की क्या आवश्यकता है। मछुआरों ने जिंदा मछलियां काट दिया बोर्ड पर रह गया, "यहां पर सस्ती और ताजी मछलियां मिलती है।"
अगले दिन एक और राहगीर आया उसने बोर्ड पढ़ा उस पर लिखा था, यहां पर "सस्ती और ताजी मछलियां मिलती है।" उसने मछुआरे से कहा "क्या आप बासी मछलियां भी बेचते हो" मछुआरे ने कहा नहीं मैं, "ताजी मछलियां बेचता हूं।" तब उसने कहा की" तो फिर बोर्ड पर ताजी लिखवाने का क्या मतलब... लोग सोचेंगे कि मरी हुई भी बेचते होंगे... मछुआरे ने ताजी भी बोर्ड से हटा दिया। अब रह गया "यहां पर सस्ती मछलियां मिलती है।"
अगले दिन एक और रहागिर आया उसने बोर्ड पढ़ा "यहां पर सस्ती मछलियां मिलती है।" तब राहगीर ने मछुआरे से कहा कि क्या आप महंगी मछलियां भी बेचते हो उसने कहा नहीं मैं सिर्फ सस्ती मछलियां बेचता हूं। तो राहगीर ने कहा कि बोर्ड पर यह क्यों लिखा है…? "मछुआरे ने सस्ती भी काट दिया अब बोर्ड पर कुछ भी नहीं बचा…"
अगले दिन एक और नया राहगिर आया उसने खाली बोर्ड देखा तो मछुआरे से कहा जब इस पर कुछ लिखा ही नहीं है तो, इसे टांग क्यों रखा है। मछुआरे को गुस्सा आ गया और उसने बोर्ड उठाकर साइड में रख दिया।
बस हमें भी उस मछुआरे की तरह अपने सारे गलत विचारों को एक-एक करके हटाते जाना है। अंत में शून्य बचेगा वही हम है। वही शून्य ईश्वर की प्राप्ति है, वही अध्यात्म है, वही शिवत्व है, तो शुरू हो जाइए… और निकाल फेंकीये अपने सारे द्वंद और गलत विचारों को शून्य में विलीन हो जाने को...
अगर हमारी कहानी आपको अच्छी लगती है तो अपने मित्रों में अवश्य शेयर कीजिए एक कदम अध्यात्म की ओर...💐💐💐
#kailashbabustory
धन्यवाद

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