"दो गधो की कहानी…"

 


"दो गधो की कहानी…"


बहुत समय पहले की बात है। एक धोबी अपने दो गधों पर नमक की चार-चार बोरिया लादकर, शहर बेचने के लिए जा रहा था।

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"दो गधो की कहानी…"

एक गधे की तबीयत कुछ सही नहीं थी। आधा रास्ता पार करने के बाद उस गधे ने दूसरे गधे से कहा की, हे! दोस्त आज मेरी तबीयत कुछ सही नहीं है। मैं एक नमक का बोरा नीचे गिरा देता हूं और आगे निकल जाऊंगा, हमारा मालिक वह बोरी तुम्हारी पीठ पर रख देगा। मेरा वजन कुछ कम हो जाएगा मैं सही से चल पाऊंगा…


दूसरे गधे ने कहा कि मैं तुम्हारा वजन क्यों झेलूँ अपना वजन अपने आप झेलो मुझे मेरा वजन ही भारी लग रहा है… 


बीमार गधा अपना सा मुंह लेकर चुपचाप चलता रहा। थोड़ी दूर जाने के बाद उसे असहनीय दर्द हुआ और वह गिरकर बेहोश हो गया। थोड़ी देर में उसके प्राण पखेरू शरीर से फुर्र हो गए… 


अब उस मरे हुए गधे की चारों बोरियां एक ही गधे पर लाद दी, अगर यह गधा अपने दोस्त की बात मानकर उसका दर्द बांट लेता तो, उसकी जान भी बच जाती और उसकी चारों बोरियों की जगह एक बोरी ही लाद कर चलनी पड़ती...


शिक्षा:- अगर कोई मुसीबत में है तो, हमें उसकी सहायता करनी चाहिए और दूसरों का दुख बांटना चाहिए। इससे हमारा दुख भी कम होता है और हमारे ऊपर विपत्ति आने पर ईश्वर किसी ना किसी को हमारी सहायता के लिए भेज देता है। 


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धन्यवाद



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