योग का ज्ञान पृथ्वी पर कैसे आया || योग || योग का इतिहास || history of yoga
"योग का ज्ञान पृथ्वी पर कैसे आया"
एक बार पार्वती जी ने भगवान शंकर से पूछा कि, मेरी हर बार मृत्यु होती है और मैं हर बार नए अवतार में आती हूं। कभी लक्ष्मी, कभी दुर्गा, कभी वैष्णव, कभी काली, कभी पार्वती... लेकिन आपकी ना तो मृत्यु होती है और ना ही जन्म। यह कैसे संभव है…? इसका रहस्य बताने की कृपा करें…?
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| योग का ज्ञान पृथ्वी पर कैसे आया |
भगवान शंकर ने कहा कि रहने दो, यह बहुत जटिल विषय है। इसके बारे में न जानो तो सही रहेगा। लेकिन पार्वती जिद पर अड़ जाती है और रहस्य जानने के लिए व्याकुल हो उठती है। भगवान शंकर कहते है, नहीं मानती हो तो सुनो यह सब "योग" से संभव है।
पार्वती जी, उस योग के ज्ञान को जानने की जिज्ञासा उत्पन्न करती है। भगवान शंकर टालमटोल करने लगते है। परंतु नारी का हट एक तरफ और भगवान शंकर को हार कर पार्वती जी को योग का ज्ञान बताना ही पड़ता है।
वे एक ऐसे स्थान का चयन करते है। जहां पर आस-पास कोई ना हो। जिससे यह महायोग का ज्ञान किसी ऐसे व्यक्ति के पास न चला जाए जो इसका दुरुपयोग कर समाज का विनाश करें। इसलिए वे पार्वती जी को लेकर बहुत दूर एक शांत सरोवर में, पार्वती जी को नाव में बिठाकर योग का ज्ञान सुनाने लगते है।
बीच-बीच में पार्वती जी हुंकार देती रहती है। भगवान शंकर ज्ञान का बखान करते-करते इतने मन मुग्ध हो जाते है कि, उन्हें पता ही नहीं रहता कि वे कहां है..? इसी उधेड़बुन में माता पार्वती की आंख लग जाती है और वे सो जाती है। इधर तालाब में दूर-दूर तक कोई न था। लेकिन एक मछली नाव के साथ-साथ चल रही थी और योग का ज्ञान सुन रही थी। जब माता पार्वती की हुंकार बंद हो गई तो, मछली ने हुंकार देना शुरू कर दिया।
भगवान शंकर को लगा कि पार्वती योग का ज्ञान सुन रही है और वे योग के ज्ञान का बखान करते रहे और संपूर्ण योग उस मछली ने सुन, उसे ग्रहण कर लिया। जैसे ही भगवान शंकर का योग का ज्ञान समाप्त हुआ, उन्होंने पार्वती जी से कहा कि अब पता चला कि "मेरी मृत्यु क्यों नहीं होती"
जब उन्होंने देखा, पार्वती तो गहरी निद्रा में सो रही है। फिर उन्होंने आसपास नजर दौड़ाई लेकिन वहां कोई ना था। फिर उन्होंने सोचा कि यह हुंकार की आवाज कोन दे रहा है…?
उस मछली ने योग का सारा ज्ञान प्राप्त कर लिया था। जिस कारण उसमें योग की शक्ति आ चुकी थी। उसने तुरंत एक बहुत सुंदर महा ऋषि का रूप धारण कर आदिनाथ से क्षमा याचना कि, हे! आदिनाथ मुझे क्षमा करे। माता पार्वती सो गयी थी। इनकी नींद में दखल न पड़े इसलिए मुझे हुंकार देनी पड़ी और फिर आप योग का ज्ञान बीच में ही छोड़ देते और मुझे पूरा ज्ञान न मिल पाता।
इतना सुनते ही भगवान शंकर को क्रोध आ गया और उन्होंने ऋषि को श्राप दिया कि योग का ज्ञान तो तुमने ले लिया। परंतु तुम्हारे जीवन में एक दिन ऐसा आएगा, जब तुम योग का संपूर्ण ज्ञान भूलकर भोग-विलास का जीवन व्यतीत करोगे। (इसी श्राप के कारण मछेन्द्रनाथ एक बार योग का सारा ज्ञान भूल कर मेनाकनि रानी से विवाह कर 12 वर्ष त्रिया चरित्र में फस जाते है। ये कहानी में आगे आएगा)
महा ऋषि ने आदिनाथ से प्रार्थना की हे! भोलेनाथ आप तो महा ज्ञानी हो। आप मुझे क्षमा कर दो। मैं आपसे बारंबार क्षमा याचना करता हूं और यह वादा करता हूं कि, इस योग के ज्ञान का कभी भी दुरुपयोग नहीं करूंगा। इतना सुनते ही भगवान शंकर का क्रोध शांत होता है और वे कहते हैं कि हे! ऋषी में अपना श्राप तो वापस नहीं ले सकता।
लेकिन एक वादा करता हूं कि, जब तुम भोग विलास में लिप्त हो जाओगे तो वहां से मैं ही आप को निकालूंगा और फिर से आप महा योग के मार्ग पर चलोगे।
लेकिन तुम्हें मेरा एक काम करना होगा। तुमको पृथ्वी लोक में योग के ज्ञान का प्रचार-प्रसार करना होगा। योग के माध्यम से दुखी-परेशान लोगों की सहायता करनी होगी। इसका आप कभी दुरुपयोग नहीं करोगे। जिस दिन आप योग का दुरुपयोग करोगे उस दिन आप का संपूर्ण ज्ञान शून्य हो जाएगा।
तुम एक मछली से महायोगी बने हो इसलिए, मैं तुम्हारा नाम मछेन्द्रनाथ रखता हूं, और मैं आपसे यह उम्मीद करता हूं कि, आप नाथ पंथ को कभी कलंकित नहीं होने दोगे…
यह ज्ञान मैंने, अभी तक चुनिंदा महा ज्ञानियों को ही दिया था। लेकिन अब आप और नाथ पंथ के माध्यम से संपूर्ण पृथ्वी लोक के वासी, इस योग से मेरे तुल्य बन सकते है। शिवत्व को प्राप्त कर सकते है। एक साधारण व्यक्ति भी योग व ध्यान का अभ्यास कर मेरे सामान बन सकता है। जाओ तुम्हारा कल्याण हो…
आदिनाथ पार्वती को लेकर अदृश्य हो जाते हैं और महायोगी मछेन्द्रनाथ नाथ पृथ्वी लोक में प्रवेश करते है...
#kailashbabustory
धन्यवाद

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